खेल जब आरम्भ हुआ चोरों का आइस-पाइश
छूप गयीं आशाएं,छूपा दी गयीं खवाइश |
खेल का पोतिया पोत लाकर लौटा नहीं
वो भी कहीं छूप गया
जब पाप की आंधी आई |
जब पाप की आंधी आई |
देश ये स्वतंत्र है
खेल ये गणतंत्र है |
खेल ये गणतंत्र है |
खेल के विपक्ष का
चलो मिलकर विद्वंश करें,
पाप के आंधी से लड़ने का प्रयत्न करें |
आम से आम की आशाओं को जगाना है ,
अब सबको मिलकर एक नया भविष्य बनाना है |